गुरुवार, 7 जनवरी 2010

शिक्षा का भूत और कितनो को निगलेगा


जिस शिक्षा को पाने की चाहत उसे थी आज वाही पढाई उसकी मौत का कारण बनी गई ।

बारवी कक्षा में पढने वाली हिमांशी का शव उसके घर से बरामद किया गया , उसने घर के पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली । हिमांशी दिलही के पुष्प विहार इलाके के सैक्टर तीन की छात्रा थी। मृतका के परिवार के मुताबिक हिमांशी की उम्र सत्रह साल थी। छमाही परीक्षा में अंक कम आने के कारण पिछले २ महीनो से छात्रा को स्कूल से निकालने की धमकियाँ मिल रही थी। हिमांशी के पिता की अचानक हुई मौत के कारण वह सदमे थी और उबरने में उसे वक़्त लग रहा था ऊपर से ऊपर से क्लास टीचर का हर छोटी बात पर उसे प्रताड़ित करना साथ ही परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए स्कूल का दबाव वो सहन न कर सकी पुलिस ने मामला पारिवारिक कलह का बनाकर लीपापोती करने की पूरी कोशिश शुरू कर दी है ।

वर्ष २०१० का आगाज़ शायद विद्यार्थियों के लिए मौत के पैगाम लेकर आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है मुंबई में सोमवार को कथित तौर पर तीन छात्रों ने खुदकुशी कर ली थी । पश्चिमोत्तर मुंबई के चैतन्यनगर इलाके में 20 वर्षीय एक छात्रा का शव उसके घर से बरामद हुई । पुलिस के अनुसार नवी मुंबई के डीवाई पाटिल महाविद्यालय की मेडिकल की यह छात्रा दो विषयों में उत्तीर्ण नहीं हो सकी थी। दूसरी घटना दादर पश्चिम इलाके की है। वहां के शारदाश्रम हाईस्कूल के एक अधिकारी ने बताया कि सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र सुशांत एकनाथ पाटिल का शव स्कूल के बाथरूम में रस्सी से लटका पाया गया। एक अन्य घटना में डोंबीवली इलाके में भी 11 वर्षीया लड़की ने कथित तौर पर इस वजह से खुदकुशी कर ली।

लगातार होती ऐसी घटनाये मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर प्रशन चीन लगाती है।

गलती शिक्षा व्यवस्था में हो या अभिभावकों कि मगर हकीकत कि जमीन पर जिन्दगी बनाने कि आंधी में कई मासूम कली खिलने से पहले ही मुरझा जाती है ।
एक सवाल जो बार बार मेरे दिल में दोड़ता है ये केसा समाज है जन्हा हम बचपन से ही गुलामी कि को मैन्जे करने का तरीका सीखते हैं तनाव को सँभालने का तरीका सिखाया जाता हे मगर क्यों हम अपने बच्चो को जीवन में मानसिक आज़ादी कि बाते नहीं पढ़ाते हैं ?

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